पक्षियों के बैकुंठ ,,घाना उधान में कदम रखते ही,,,ख्वाब को हकीकत में तब्दील होने का पल माना। सामने एक पक्की एक वाहन के लायक चौड़ी सड़क जाती दिख रही थी।
प्रवेश करते ही बायीँ ओर टिकट काउंटर दिखा,,वहाँ जाकर टिकट लिया।
पर टिकट लेने में एक संकट से गुजरा,,संकट यह था कि टिकट के लिए भारतीयों को 75 रूपया देना होता है। और विधार्थियों को मात्र 25 रूपया।हमें यह लग रहा था की हम भारतीय विधार्थी हैं।अत: 25 रूपया वाले में जाना चाह रहे थे। बैग में पहले जामिया वाला पहचान पत्र खोज ,,पर उस समय नही मिला। सोचा शायद बैग में डाले नही होगें। क्योंकि एक साथ आधार कार्ड,,निर्वाचन आयोग,और जामिया वाला कार्ड लेकर नही चलते हैं,,खो जाने के डर से। इसलिए मन में सोच लिया,,नही होगा।
फिर ,,उत्तर - प्रदेश लोक सेवा आयोग वाला प्रवेश पत्र दिखाया,,,सोचा विधार्थी समझा जाउँ,,,पर बात बना नही,,हार कर पूरा पैसा दिया। पर अफसोस इस बात का हुआ की रात में( आगरा में) जब होटल में बैग से कुछ निकाल रहा था,,तो जामिया वाला कार्ड दिख गया। लगा थोड़ा सा गलती के कारण पचास गवाया।
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